भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और चिकित्सा विशेषज्ञता एक-दूसरे के विकल्प नहीं, सहयोगी शक्तियां
-एआई और टेलीमेडिसिन के जरिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से प्रगतिपथ पर देश
-टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ के नए आयामों पर मंथन, AIIMS ऋषिकेश में TSI मिड-टर्म CME का आयोजन, चिकित्सा विशेषज्ञों ने व्याख्यानमाला प्रस्तुत की।
एम्स, ऋषिकेश में टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के बदलते स्वरूप पर टेलीमेडिसिन सोसायटी ऑफ इंडिया (TSI), उत्तराखंड चैप्टर के तत्वावधान में आयोजित टीएसआई मिड-टर्म सीएमई में विशेषज्ञों ने संबंधित विषय पर व्याख्यान एवं अनुभव साझा किए। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के सहयोग से आयोजित TSI Mid-Term CME में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षकों एवं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
सोमवार को आयोजित कार्यशाला का संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं TSI, उत्तराखंड की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह विधिवत शुभारंभ किया गया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, विशेषज्ञ परामर्श और स्वास्थ्य सेवाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने में डिजिटल तकनीक एवं टेलीमेडिसिन की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान टीएसआई के अध्यक्ष एवं मोहन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. सुनील श्रॉफ ने “AI Innovation vs Data Protection – Finding the Balance in Healthcare” विषय पर अध्यक्षीय संबोधन दिया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग के साथ मरीजों के डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा और जिम्मेदार AI के महत्व पर चर्चा की।
SGPGIMS, लखनऊ के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आर.के. सिंह ने इमरजेंसी एवं आईसीयू में टेलीमेडिसिन की भूमिका पर व्याख्यान दिया, जबकि TSI की उपाध्यक्ष डॉ. उमा नांबियार ने टेलीहेल्थ इकोसिस्टम में मरीजों की सुरक्षा एवं गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में एम्स, बीबीनगर के प्रोफेसर एवं रेडियोडायग्नोसिस विभागाध्यक्ष डॉ. अभिषेक अरोड़ा ने टेलीरेडियोलॉजी पर अपने विचार रखे। वहीं ISRO के Human Space Flight Programme से जुड़े रहे एवं TSI के President-Elect डॉ. मूर्ति रेमिला ने Human Space Flights – Past, Present and Future विषय पर विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया।
इसके अतिरिक्त NIMHANS, (निम्हांस) के डीएम न्यूरोलॉजी एवं इन्टरवेंशन न्यूरोरेडियोलॉजी (Interventional Neuroradiology ) विशेषज्ञ डॉ. श्रीराम वर्धराजन ने अपने विषय से संबंधित महत्वपूर्ण वैज्ञानिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अगले सत्र में डॉ. अजय कुमार द्वारा Aerospace Medicine पर चर्चा की गई।
सीएमई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और Emergency Medicine के भविष्य पर भी विशेष चर्चा हुई। चिकित्सा आपात स्थितियों में AI के संभावित उपयोग, clinical decision-making में इसकी भूमिका तथा स्वास्थ्य सेवाओं में नई तकनीकों के सुरक्षित एवं प्रभावी इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों के लिए AI-based instruments का hands-on experience भी आयोजित किया गया, जिससे उन्हें आधुनिक AI तकनीकों के व्यवहारिक उपयोग को समझने का अवसर मिला।
एम्स, ऋषिकेश इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की प्रमुख एवं Additional Professor तथा TSI Uttarakhand की Honorary Secretary डॉ. निधि कैले ने Snake Bite Management & Role of Telemedicine in Snake Bite Management ( सांप के काटने का इलाज और इसे उपचार में टेलीमेडिसिन की भूमिका) विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
यह सत्र उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के संदर्भ में विशेषरूप से महत्वपूर्ण रहा, जहां दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह उपलब्ध कराने जैसे विषय पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
TSI, Uttarakhand की ओर से कार्यक्रम में निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह, डॉ. अंकुर मित्तल और डॉ. निधि कैले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर डॉ. सुनील श्रॉफ, डॉ. मूर्ति रेमिला, डॉ. उमा नांबियार एवं डॉ. उमा शंकर सहित TSI के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
कार्यशाला के संरक्षक के तौर पर संस्थान की निदेशक एवं सीईओ प्रो. मीनू सिंह, जबकि डीन एकेडमिक्स प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सत्य श्री बलीजा सह-संरक्षक रहे।
बताया गया है कि TSI (टेलीमेडिसिन सोसायटी ऑफ इंडिया) का उद्देश्य देश में टेलीमेडिसिन, डिजिटल हेल्थ एवं संबंधित तकनीकों के विकास, शिक्षा, अनुसंधान और व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना है। एम्स, ऋषिकेश में आयोजित यह सीएमई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई, जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में तकनीक और चिकित्सकीय विशेषज्ञता एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी शक्तियां होंगी।
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को देश के दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इंसेट
टेली-ICU की स्थापना पर डॉ. आर.के. सिंह का व्याख्यान
सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण डॉ. आर.के. सिंह का व्याख्यान रहा, जिसमें उन्होंने टेली-ICU की स्थापना एवं संचालन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार टेलीमेडिसिन तकनीक के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं को दूरस्थ क्षेत्रों और सीमित संस्थानों वाले अस्पतालों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।
व्याख्यान में टेली-ICU के लिए आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल कनेक्टिविटी, मॉनिटरिंग सिस्टम, विशेषज्ञ टीम, प्रोटोकॉल एवं 24×7 समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि टेली-ICU आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रिटिकल केयर की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है ।
