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यहाँ महिलाएं घरेलू कार्याे के साथ-2 अपनी आय बढ़ाने का कर रही है बेमिसाल कार्य।

सफलता की कहानी:

*‘सरकार की सजग पहल से 855-ग्रामीण महिलाएं बनी सफल उद्यमी’*
‘महिला उद्यमिता विकास में स्वयं सहायता समूह का योगदान’

विकास खण्ड चम्बा की ग्राम पंचायत मंज्याड़गांव की उप ग्राम कोटीगाड की महिलाओं द्वारा ग्राम कोटीगाड में ‘‘उत्साह स्वायत्त सहकारिता समूह‘ का गठन किया।
महिलाएं घरेलू कार्याे के साथ-2 अपनी आय बढ़ाने का कर रही है बेमिसाल कार्य।

जिससे प्रत्येक महिला लखपति दीदी बनने की क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
समूह के गठन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के उत्थान एवं आर्थिकी सुधार के क्षेत्र में कार्य करना है, समूह द्वारा ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के वित्तीय सहयोग द्वारा सैमी आटोमैटिक सैनेट्री पैड प्रोडेक्शन यूनिट की स्थापना की गई।

जिसमें वित्तीय सहयोग धनराशि रू.-6.00 लाख ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना द्वारा, बैंक लोन 3.00 लाख, स्वयं का अंशदान 1.00 लाख रु० प्राप्त हुआ है।
यूनिट स्थापना का उद्देश्य आजीविका संघ से जुड़े लगभग 855 ग्रामीण महिलाओं को प्रत्येक माह सैनेट्री पैड उपलब्ध करवाना है। समूह द्वारा पूर्व में मैन्युवल तरह से सैनेट्री पैड का निर्माण किया जा रहा था, जिसमे प्रति दिन केवल 30 से 40 सैनेट्री पैड ही बन रहे थे ग्रामोत्थान परियोजना सहयोग द्वारा आजीविका संघ ने सैमी आटोमेटिक सैनेट्री पैड मैकिंग मशीन क्रय की गई। जिससे वर्तमान में प्रति दिन 1000 पैड का निर्माण किया जा रहा है। जिससे आजीविका संघ की मासिक आय के साथ साथ ग्रामीण महिलाओं को भी सस्ते, सुरक्षित एवं हाईजिनिक सैनेट्री पैड की सुविधा ग्रामीण क्षेत्र में ही प्रदान की जा रही है।
समूह द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग में वर्तमान तक लगभग 60 हजार रुपए के सैनेट्री पैड विक्रय किये जा चुके हैं, इसके साथ स्थानीय दुकानों एवं सरकारी विभागों में भी आपूर्ति की जा रही है। टिहरी गढ़वाल जनपद में गठित 26 कलस्टर स्तरीय फैडरेशनों द्वारा भी प्रति फैडरेशन 500 पैक का ऑडर दिया गया है। वर्तमान में ग्रामोत्थान रीप परियोजना जनपद टिहरी गढ़वाल के 09 विकासखण्डों में संचालित की जा रही है, जिसमें लगभग 12000 परिवार जुड़े है।
आज ‘‘उत्साह आजीविका स्वायत्त सहकारिता समूह’ के ग्रोथ सेन्टर में आटा चक्की द्वारा मोटे अनाजों की पिसाई कर पैकिंग कार्य, मसाला चक्की द्वारा तैयार किये जा रहे धनिया पाउडर, हल्दी आदि मसालों, विभिन्न प्रकार के स्थानीय फलों से बनाये गये अचार आदि उत्पादों का कार्य भी किया जा रहा है।

जिससे उत्पाद निर्माण व बिक्री तक समूह की महिलाओं की आजीविका में भी वृद्वी हो रही है।
समूह की महिलाओं ने वार्ता के दौरान बताया कि समूह द्वारा उत्पादित उत्पादों को स्थानीय बाजार में उचित दाम मिल रहे हैं इसलिए अधिक मात्रा में स्थानीय उत्पाद बढाने का लक्ष्य रखा है तााकि आय में और अधिक वृद्धि हो सके।

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