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सतत उपलब्धियों का पर्याय बना एम्स , बिना कृत्रिम जोड़ के जन्मजात चेहरे की विकृति का सफल सुधार * सर्जरी के बाद मरीज पूर्णतः सामान्य रूप में।

सतत उपलब्धियों का पर्याय बना एम्स
* बिना कृत्रिम जोड़ के जन्मजात चेहरे की विकृति का सफल सुधार
* सर्जरी के बाद मरीज पूर्णतः सामान्य रूप में
* एम्स ऋषिकेश के दंत चिकित्सा विभाग ने दिखाया उच्च कौशल
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS, ऋषिकेश ने सतत उपलब्धियों की श्रंखला में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। संस्थान के दंत चिकित्सा विभाग की मुख एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी टीम ने जबड़े के जोड़ के संलयन (टीएमजे एंकिलोसिस) और गंभीर चेहरे की विषमता से पीड़ित 18 वर्षीय मरीज का बिना किसी कृत्रिम जबड़े के जोड़ के पूर्ण चेहरे का सफल सुधार करके वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने इस सफल सर्जरी को अंजाम देने वाली टीम की सराहना है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश का उद्देश्य मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं, उन्नत तकनीक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्यतः ऐसे मामलों में कृत्रिम जोड़ प्रत्यारोपण आवश्यक माना जाता है। किंतु इस जटिल मामले में टीम ने बिना कृत्रिम जोड़, सर्जिकल कटिंग गाइड, ऑक्लूसल स्प्लिंट, स्टीरियोलिथोग्राफिक मॉडल या ऑर्थोडॉन्टिक ब्रेसेस के सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की।
मरीज का मुंह बिल्कुल नहीं खुल रहा था। निचला जबड़ा लगभग 2 सेमी पीछे था, रैमस की ऊंचाई में 2 सेमी का अंतर था, ठोड़ी 12 मिमी बाईं ओर झुकी हुई थी, होंठ का बायां कोना 1 सेमी ऊपर उठा हुआ था तथा सामने के दांत 1 सेंटीमीटर नीचे थे । सामाजिक और मानसिक रूप से भी वह प्रभावित था।
दंत विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ के अनुसार, सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। इसमें जबड़े के संलयन को मुक्त करना, निचले जबड़े को आगे बढ़ाना, ऊर्ध्वाधर असंतुलन सुधारना, ऊपरी जबड़े की पोजीशन ठीक करना तथा मैक्सिलो-मैंडिबुलर कॉम्प्लेक्स का संतुलन स्थापित करना शामिल था। पूरी योजना रेडियोग्राफिक विश्लेषण और सीटी आधारित वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर आधारित थी।
ऑपरेशन के बाद मरीज का मुंह 41 मिमी. तक खुलने लगा और चेहरे की विकृति पूर्णतः संतुलित हो गई। पोस्ट-ऑपरेटिव मॉनिटरिंग में मरीज सामान्य पाया गया। उसे देखकर सर्जरी का आभास तक नहीं होता।
इस जटिल सर्जरी को प्रो. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय, एमएस डॉ. सत्या श्री बलिजा एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशी चुग के मार्गदर्शन में संपन्न किया गया। टीम में डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ सहित डॉ. रोहित किरण लाल, डॉ. आकांक्षा व्यास, डॉ. अपर्णा महाजन, डॉ. नाज़िश खान, डॉ. सिमरन शाह और डॉ. संतोष चिट्टीबाबू शामिल रहे।
मरीज और उसके परिजनों ने उपचार के बाद अत्यधिक संतोष व्यक्त किया। अब वह सामान्य रूप से भोजन कर पा रहा है और आत्मविश्वास के साथ जीवन जी रहा है।
इंसेट यह होती हैं मैक्सिलोफेशियल सर्जन की विशेषज्ञताएं

ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन चेहरे की हड्डियों, जबड़े के जोड़ों, आघात, विकृतियों और सौंदर्य संबंधी सर्जरी के विशेषज्ञ होते हैं।

कृत्रिम जबड़े के जोड़ों में संक्रमण, ढीलापन, मेटालोसिस और अन्य जटिलताओं का जोखिम रहता है। ऐसे में बिना कृत्रिम जोड़ के किया गया यह सफल सुधार सर्जिकल विशेषज्ञता और अनुभव का उत्कृष्ट उदाहरण है।

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