Khabar Ganga Kinare Ki
Breaking Newsआकस्मिक समाचारउत्तराखंडटिहरी गढ़वालदिन की कहानीदेहरादूनविशेष कवरस्टोरीस्वास्थ्य

जटिल सर्जरी के लिए रीजन का नोडल सेंटर बन गया है एम्स! उत्तराखंड ही नहीं उत्तरप्रदेश, दिल्ली से भी शल्य चिकित्सा के लिए आ रहे मरीज संस्थान के शल्य चिकित्सा विभाग ने 100 जटिलतम सर्जरी से मरीजों को दिया जीवनदान।

जटिल सर्जरी के लिए रीजन का नोडल सेंटर बन गया है एम्स!
उत्तराखंड ही नहीं उत्तरप्रदेश, दिल्ली से भी शल्य चिकित्सा के लिए आ रहे मरीज
संस्थान के शल्य चिकित्सा विभाग ने 100 जटिलतम सर्जरी से मरीजों को दिया जीवनदान
डॉ. अमित गुप्ता की अगुवाई में चिकित्सकीय टीम ने की उपलब्धि हासिल, एम्स प्रबंधन ने सराहा।

एम्स,ऋषिकेश के शल्य चिकित्सा विभाग में चिकित्सकीय टीम ने विभाग के वरिष्ठ आचार्य एवं डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल ऑंकोलॉजी के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. अमित गुप्ता की अगुवाई में अब तक पेनक्रियाज, पित्त की नली, ड्योडियम पैरिएंप्यूलरी आदि से संबंधित 100 से अधिक जटिल मामलों की सफलतापूर्वक सर्जरी को अंजाम देते हुए मरीजों को जीवनदान दे चुकी है। उनकी मरीजों के उपचार को लेकर प्रतिबद्धता व शत प्रतिशत बेहतर रिजल्ट देने के लिए संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ. ) मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) जया चतुर्वेदी एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉक्टर बी. सत्याश्री ने डॉ. अमित एवं उनकी टीम के चिकित्सकों के कार्यों की सराहना की और उन्हें बधाई दी है।
गौरतलब है कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश बीते कुछ वर्षों में उत्तराखंड ही नहीं वरन समीपवर्ती प्रदेशों के मरीजों के लिए जटिल सर्जरी हेतु एक नोडल सेंटर बन गया है, जहां हररोज विभिन्न माध्यम से काफी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
डॉ. अमित के अनुसार उन्होंने लगभग 10 वर्ष पूर्व एम्स संस्थान में ज्वानिंग ली थी। इसके बाद से अब तक उनकी अगुवाई में सर्जरी विभाग के अधिनस्थ चिकित्सकों व एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के सहयोग से करीब एक सौ मरीजों की जटिल सर्जरियों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा चुका है।

जिनमें पेनक्रियाज के कैंसर, पित्त की नली, ड्योडियम पैरिएंप्यूलरी आदि जटिलतम श्रेणी की शल्य चिकित्साएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि उक्त बीमारियों से ग्रसित मरीज पीलिया, पेट दर्द, भूख नहीं लगने आदि शिकायतें लेकर आते हैं।
जो कि इन बीमारियों के लक्षण होते हैं।

सघन जांच पड़ताल के बाद मरीज में उक्त बीमारियों की पुष्टि होने पर कुछ अन्य सामान्य जांचें व पीएससी ( बेहोशी) की जांच के उपरांत मरीज के ओटी के लिए फिट पाए जाने के बाद उसकी शल्य चिकित्सा की जाती है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में इन बीमारियों के अब तक जो भी मामले आए हैं उनके अब तक के शत-प्रतिशत परिणाम रहे हैं। हालांकि इन तमाम तरह की बीमारियों की सर्जरी अत्यधिक जटिल व जोखिमभरी होती है।

इंसेट
इस सर्जरी को मेडिकल साइंस में व्हिपल्स सर्जरी के नाम से जाना जाता है।

डॉ. अमित गुप्ता के मुताबिक पेनक्रियाज के कैंसर, पित्त की नली, ड्योडियम पैरिएंप्यूलरी आदि जटिलतम सर्जरी के लिए ऋषिकेश एम्स अस्पताल में उत्तराखंड ही नहीं उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब आदि दूरदराज के मरीज भी पहुंच रहे हैं।

वहीं उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में उक्त शल्य चिकित्साओं पर मरीज का काफी खर्च आता है, जबकि एम्स अस्पताल में उक्त बीमारियों का ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजन में कवर है।

आपरेशन से पूर्व रक्त के नमूनों की जांच और मरीज में सर्जरी के लिए जरूरी रक्त की आवश्यकता देखी जाती है, रक्त की मात्रा कम पाए जाने पर रक्तदाता की आवश्यकता होती है।

इंसेट

एचपीबी क्लिनिक का संचालन
उन्होंने बताया कि सर्जरी विभाग के अंतर्गत एचपीबी स्पेशल क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है, जिसकी ओपीडी सप्ताह में दो दिन मंगलवार व शुक्रवार को है। जिसमें गालब्लेडर कैंसर, लीवर एंड पेनक्रियाज कैंसर व इससे जुड़ी अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों का परीक्षण एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है। क्लिनिक में सर्जरी विभाग के डॉ. अमित गुप्ता व डॉ. कर्मवीर सिंह सेवाएं दे रहे हैं। जबकि सर्जिकल ऑंकोलोजी विभाग में डॉ. रीतू ठाकुर व डॉ. राहुल कुमार संबंधित मामलों में सहयोग कर रहे हैं।

Related posts

जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार‘‘ महाभियान के तहत आज मंगलवार दिनांक 13 जनवरी 2026 को जनपद के चार स्थानों पर शिविर किये गए आयोजित।

khabargangakinareki

Haryana News: शताब्दी में बुजुर्ग को दो बार आया हार्ट अटैक, पंचकूला के डॉक्टर ने सीपीआर देकर बचाई जान

khabargangakinareki

Uttarakhand राज्य कर्मचारियों को लंबित 4% DA बढ़ोतरी मिलेगी, CM Dhami ने आश्वासन दिया।

khabargangakinareki

Leave a Comment