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चैत्र नवरात्र पर्व पर देशभर के मंदिरों में दिखाई दिया आस्था का सैलाब । चारों ओर माँ के जयकारों से गूँज उठा देश, प्रदेश।

स्थान। नैनीताल।
चैत्र नवरात्र पर्व पर देशभर के मंदिरों में दिखाई दिया आस्था का सैलाब । चारों ओर माँ के जयकारों से गूँज उठा देश, प्रदेश।
रिपोर्ट। ललित जोशी
नैनीताल। सरोवर नगरी समेत पूरे देश, प्रदेश एवं जनपदों में चैत्र नवरात्रि की शुरूआत आज हो चुकी है ।सुबह से ही श्रद्धालुओं द्वारा ब्रत आदि रख कर घर में पूजा अर्चना करने के बाद मंदिरों के लिए प्रस्थान किया गया जिससे चलते देशभर में मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। बताया जाता है आज से हिन्दुओ का नव वर्ष भी शुरू हो जाता है।
इस दौरान हर तरफ माता रानी के जयकारे गूंज रहे हैं। उत्तराखण्ड में भी चैत्र नवरात्रि को लेकर उल्लास और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है।
नैनीताल व उसके आसपास सुबह से ही भक्तों का जमावड़ा मंदिरों में लगा हुआ है।
जिसमें घोड़ाखाल, कैची धाम, हनुमान गढ़, गुफामहादेव, स्नोव्यू देव मंदिर, सत्य नारायण मंदिर के अलावा विश्व प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
इस दौरान भक्तजन मां के नौ रूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंदिर परिसर भक्ति और आस्था के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया।
दूर-दूर से आए श्रद्धालु मां नयना देवी के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस कर रहे हैं। मंदिर में विशेष पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन के साथ साथ सुंदर कांड का आयोजन भी किया जा रहा है।

इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता भी बेहद खास है। मान्यता के अनुसार जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपमानित होकर हवन कुंड में आत्माहुति दी, तो भगवान शिव उनका पार्थिव शरीर लेकर पूरे ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। इससे सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया।

मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि सती की बाईं आंख नैनीताल में गिरी, जिसके बाद यहां मां नयना देवी की स्थापना हुई। यही कारण है कि इस स्थान को शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है।

फिलहाल नवरात्रि के पावन दिनों में नैनीताल में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है और श्रद्धालु पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मां के मंदिर में पहुँच कर पूजा अर्चना करने में लगे हुए हैं।

यहाँ हर वर्ष नन्दा सुनन्दा देवी महोत्सव भी आयोजित किया जाता है।

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