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टूटी हड्डियों’ को जोड़कर एम्स लौटा रहा घायलों की ’मुस्कान’ – संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे फ्रैक्चर कूल्हों का इलाज।

– ’टूटी हड्डियों’ को जोड़कर एम्स लौटा रहा घायलों की ’मुस्कान’
– संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक कर रहे फ्रैक्चर कूल्हों का इलाज
– एम्स ऋषिकेश में उपलब्ध है ’पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी’ की सुविधा ।

किसी दुर्घटनावश कूल्हे की हड्डियाँ टूट गई हों या फिर खिसक गई हों तो घबराइये मत।
एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सक न केवल कूल्हे के जोड़ों को जोड़कर रोगी का बेहतर इलाज कर रहे हैं अपितु टूटी हुई हड्डियों को सही जगह फिक्स कर कूल्हे की सामान्य संरचना को भी बहाल करने में दक्ष हैं।

मेडिकल भाषा में ’पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी’ के नाम से कही जाने वाली यह शल्य प्रक्रिया एम्स में नियमित तौर से की जा रही है। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया आयुष्मान योजना में कवर है और सरकारी खर्चे पर पूरी तरह निःशुल्क है।

पेल्विस ऐसिटाबुलम सर्जरी अत्यंत जटिल सर्जरी होती है। किसी सड़क दुर्घटना में अथवा बहुत अधिक उंचाई या पहाड़ी से नीचे गिर जाने की स्थिति में तीव्र आघात की वजह से कूल्हे की हड्डी टूट जाने पर यह सर्जरी की जाती है।

ट्राॅमा के ऐसे मामलों में कभी-कभी हड्डी टूटने के साथ ही पेट की चोट, आंतों की चोट अथवा पेशाब की थैली में भी गहरी चोट लग जाती है। इस वजह से घायल व्यक्ति न तो बैठ पाता है और न ही चल पाने में सक्षम होता है। इसके लक्षणों में दुर्घटना ग्रस्त व्यक्ति की कमर और कूल्हे के जोड़ों में असहनीय दर्द, पांव का नहीं चलना और बैठने व खड़े होने में परेशानी होना शामिल है।

इस जटिल सर्जरी में ऑपरेशन के दौरान यूरीन ब्लैडर, इंस्टेस्टाइन, बड़ी रक्त वाहिकाओं और नसों का विशेष ध्यान रखना होता है। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के हेड प्रोफेसर डाॅ. कमर आजम ने बताया कि यह एक जटिल सर्जरी है और दुर्घटना के कारण क्षतिग्रस्त कूल्हे का सही वक्त पर सटीक इलाज किया जाना बहुत जरूरी है। कहा कि एम्स में इस सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।

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क्या है पेल्विस और एसिटाबुलम सर्जरी?
पेल्विस (रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा जो कूल्हे से जुड़ता है) और एसिटाबुलम कूल्हे के जोड़ (सॉकेट) सर्जरी के जटिल फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए की जाने वाली यह एक प्रमुख ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया है। आमतौर पर यह परेशानी भीषण दुर्घटनाओं के दौरान गंभीर चोट लगने या नीचे गिरने से होती है। इस सर्जरी में एम.आर.आई कम्पेटिबल धातु की प्लेटों और पेंचों का उपयोग करके कूल्हे की हड्डियों को स्थिर किया जाता है।

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9 माह में की गयी 69 सर्जरी,
एम्स ऋषिकेश में ट्राॅमा सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. मान सिंह जारोलिया इस जटिल सर्जरी के ज्ञाता हैं। डाॅ. मान सिंह द्वारा जुलाई 2025 में एम्स ज्वाॅइन करने के बाद 10 मई 2026 तक पेल्विस ऐसिटाबुलम की 69 सर्जरी की जा चुकी हैं। इसमें एक 15 वर्षीय युवक से लेकर अधिकतम 85 वर्ष की उम्र के एक वयोवृद्ध की सर्जरी शामिल है। इससे पहले डॉ. मान सिंह अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर इथियोपिया अफ्रीका, ऑस्ट्रिया और यूरोप देशों में इसका अनुभव हासिल कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए यह सेवा उच्च गुणवत्ता के इंप्लांट के साथ पूर्णत निःशुल्क है।

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’’ट्राॅमा सर्जरी और इरजेन्सी सेवाओं को संस्थान द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उच्च अनुभवी डाॅक्टरों की टीम की बदौलत हम ट्राॅमा केयर में अपनी उत्कृष्टता बनाए हुए हैं। खासतौर से ट्राॅमा सर्जरी के मामले में एम्स विश्व स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल कर इलाज में बेहतर अनुभव और कौशलता का उपयोग कर रहा है। हमारे चिकित्सक गंभीर स्थितियों और जटिल ट्राॅमा मामलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं। ’’
——– प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक एम्स ऋषिकेश।

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