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उत्तराखंड सदन दिल्ली में राज्यमंत्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल का भव्य सम्मान समारोह। उत्तराखंड की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना आयोजन।

उत्तराखंड सदन दिल्ली में राज्यमंत्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल का भव्य सम्मान समारोह।
उत्तराखंड की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बना आयोजन।

**नई दिल्ली,  उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री श्री **वीरेंद्र दत्त सेमवाल** के सम्मान में मंगलवार को दिल्ली स्थित **उत्तराखंड सदन** में एक भव्य **सम्मान समारोह** का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का आयोजन *पर्वतीय लोक विकास समिति*, *टिहरी उत्तरकाशी जन विकास परिषद*, *भिलंगना क्षेत्र विकास समिति*, *बुरांश साहित्य एवं कला केंद्र*, *उत्तराखंड एकता मंच*, *पर्वतीय न्यूज*, *हिमाद्री*, *गढ़वाल कुमाऊं एकता मंच* और *उत्तरायणी संस्था* द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

कार्यक्रम की **अध्यक्षता वर्तमान टिहरी विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री श्री किशोर उपाध्याय** ने की। उन्होंने श्री सेमवाल के उत्तराखंड के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा, *“वीरेंद्र दत्त सेमवाल को यह जिम्मेदारी बहुत पहले दी जानी चाहिए थी। राज्यहित में उनका योगदान उल्लेखनीय और अतुलनीय है।”*

**वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री सूर्य प्रकाश सेमवाल** ने कहा कि *“सेमवाल जी हिमालय के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जाकर उत्तराखंड को हथकरघा और हस्तशिल्प के क्षेत्र में नई ऊंचाई देंगे।”*
**साहित्यकार श्री प्रदीप बेलवाल** ने कहा, *“उनकी अगुवाई में पहाड़ के भेड़ पालकों को नया अवसर, आधुनिक मॉडल और तकनीकी लाभ मिल सकेगा।”*

इस अवसर पर कई **वरिष्ठजनों और युवा प्रतिनिधियों** की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें **श्री नीरज बवाड़ी, अर्जुन सिंह राणा, गिरिश बलूनी, मंजू बिष्ट, संजय तड़ियाल, मोरार सिंह कंडारी** आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। इन सभी ने मंत्री सेमवाल के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें उत्तराखंड के जनसेवा पथ पर निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हुए पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को जीवंत बना दिया।

मंत्री श्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल को पारंपरिक **टोपी, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह** भेंट कर सम्मानित किया गया।

अपने वक्तव्य में मंत्री सेमवाल ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, *“यह सम्मान मेरे लिए उत्तराखंड की जनता की अपेक्षाओं का प्रतीक है।

 

मैं राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”*

कार्यक्रम का समापन उत्तराखंड की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और समावेशी विकास के संकल्प के साथ हुआ।

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